FAQ's

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A : जैन धर्म का प्रादुर्भाव भारत में हुआ। लेकिन आज भारत में कुल जैनियों की जनसंख्या मात्र 0.4% है कुल जनसँख्या करीब 45 लाख है। पाया गया है कि 1981 के उपरांत काफी संख्या में जैन धर्मावलंबी जनगणना के समय में अपने धर्म के बारे में लिखना भूल जाते हैं फिर यह गलत अंकित होता रहता है। 1991 में जैनों की जनसंख्या वृद्धि दर मात्र 4.5% थी जो 2001 में अथक प्रयास किये गए कि सभी जैन बंधु अपने धर्म का का प्रॉपर(सही) उल्लेख करें उसके कारण 2001 के अंदर वृद्धि दर 26% पाई गई। 2011 में यह फिर मात्र 5.3% रह गयी। यह दर में जब भी गिरावट होती है गिरावट का मूल कारण या तो महामारी हो या युद्ध हो। जैन समाज एक स्वस्थ व समृद्ध समाज है इसमें इतनी भारी गिरावट इस ओर इशारा करती है कि हम लोगों ने उस पर ध्यान नहीं दिया, समय नहीं दिया। समय ना देने का कारण यह है कि हमारी जैन में करीब 80% शहर में रहते हैं और करीब 95% शिक्षित है। तो जो शिक्षित और समृद्ध समाज होता है वह जनगणना में ज्यादा महत्व नहीं देता।
A : जैन मंदिर की जानकारी के लिए जिसमें जैन मंदिरों की जनगणना की जाएगी। इस प्रारूप में 5 मदों की जानकारी हम आप लोगों से चाहेंगे; मंदिर का नाम, मंदिर का पता, मंदिर के मैनेजर/अध्यक्ष/सचिव का मोबाइल नंबर, और अगर आपके पास जानकारी हो तो यह सूचित करें कि यह मंदिर कब बना था। यह जानकारी मिलेगी तो हमारे 40000 जो मंदिर है जो अलग-अलग गांव और शहरों में में स्थित हैं उनका जीर्णोद्धार, समय पर पूजा आदि संभव होगी और साथ साथ यह 40000 मंदिर हमारी जैन प्रभावना के स्रोत होंगे।
A : इस समय जैन जनसंख्या के लिए कुल मिलाकर 5 मदों की जानकारी करनी है पहला तो है जैन पता, उसके बाद में मुखिया का नाम, उसका मोबाइल नंबर और परिवार में सदस्यों की संख्या + मुख्या का व्यवसाय